नागरिक पंजीकरण प्रणाली (CRS)

पाठ्यक्रम: GS2/शासन

संदर्भ

  • भारत ने 2024 में अपने अनुमानित जन्मों और मृत्यु के 99% से अधिक का आधिकारिक पंजीकरण किया है। यह जानकारी नागरिक पंजीकरण प्रणाली के नवीनतम आधिकारिक आँकड़ों में सामने आई है।

मुख्य निष्कर्ष

नागरिक पंजीकरण प्रणाली

  • जन्म, मृत्यु तथा मृतजन्म से संबंधित आँकड़े: नागरिक पंजीकरण प्रणाली के अंतर्गत एक सतत एवं अनिवार्य व्यवस्था के माध्यम से दर्ज किए जाते हैं।
  • यह भारत के जनसंख्या संबंधी आँकड़ों, जैसे—अनुमानित जन्म एवं मृत्यु, मृत्यु-दर, प्रजनन-दर तथा जन्म के समय लिंगानुपात के सटीक आकलन का आधारभूत स्रोत है।
  • इसका संचालन गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा किया जाता है।
  • सीआरएस वर्ष 1970 से विधिक रूप से लागू है, यद्यपि प्रारंभिक वर्षों में इसकी पहुँच एवं पंजीकरण की पूर्णता सीमित रही।
  • यह प्रणाली जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अंतर्गत संचालित होती है, जिसमें वर्ष 2023 में संशोधन किया गया।
  • सामान्यतः जन्म एवं मृत्यु की सूचना 21 दिनों के अंदर देना अनिवार्य है।
  • अस्पतालों में जन्म या मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित चिकित्सा अधिकारी अथवा अधिकृत अधिकारी इसकी सूचना देने के लिए उत्तरदायी होता है।
  • घर पर जन्म या मृत्यु होने की स्थिति में सामान्यतः परिवार का मुखिया अथवा अधिनियम में निर्दिष्ट अन्य व्यक्ति इसकी सूचना देने के लिए उत्तरदायी होता है।

वर्षों के दौरान आँकड़ों की प्रगति

  • वर्ष 2000 तक भारत में केवल 56% जन्म तथा 48% मृत्यु का ही पंजीकरण हो पाता था।
  • वर्ष 2014 तक यह आँकड़ा बढ़कर क्रमशः 86.6% तथा 72.5% हो गया।
  • वर्ष 2024 में जन्म पंजीकरण 99.1% तथा मृत्यु पंजीकरण 99.4% तक पहुँच गया।
  • राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2024 में 18 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने 100% जन्म पंजीकरण, जबकि 21 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने 100% मृत्यु पंजीकरण का लक्ष्य प्राप्त किया।

वर्ष 2024 में आँकड़ों के पंजीकरण में वृद्धि के कारण

  • जन्म पंजीकरण में वृद्धि: अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में संस्थागत प्रसवों की संख्या में वृद्धि, जिसे प्रसवोत्तर लाभों द्वारा प्रोत्साहित किया गया।
  • विद्यालयों में प्रवेश, पहचान संबंधी दस्तावेजों, कल्याणकारी योजनाओं तथा अन्य सरकारी कार्यों के लिए जन्म प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता।
  • मृत्यु पंजीकरण में वृद्धि: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी स्वास्थ्य बीमा एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के विस्तार से अधिक लोगों का औपचारिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँचना।
  • पेंशन, बीमा दावे, उत्तराधिकार, संपत्ति हस्तांतरण, बैंक खातों तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए मृत्यु प्रमाण-पत्र की आवश्यकता।
  • अधिनियम में संशोधन: जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से नागरिक पंजीकरण प्रणाली को अधिक व्यापक, समयबद्ध एवं सुलभ बनाया गया।

आँकड़ों का महत्त्व

  • प्रशासनिक उपयोग: स्वास्थ्य एवं सामाजिक नीतियों के प्रभाव का आकलन करने तथा प्रजनन, मृत्यु-दर एवं जनसंख्या परिवर्तन की प्रवृत्तियों को समझने में सहायक।
  • वास्तविक समय की जानकारी: जन्म एवं मृत्यु का समय पर पंजीकरण जनसांख्यिकीय परिवर्तनों तथा जनस्वास्थ्य की स्थिति की वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध कराता है।
    • सीआरएस उच्च तापमान एवं वायु प्रदूषण जैसे कारणों से होने वाले मौसमी मृत्यु-परिवर्तनों को समझने में भी महत्त्वपूर्ण है।
  • स्थानीय योजना निर्माण: पूर्ण एवं विश्वसनीय सीआरएस विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर योजना निर्माण में सहायक है, क्योंकि जिला एवं उप-जिला स्तर के आँकड़े राष्ट्रीय अथवा राज्य स्तर के आँकड़ों की तुलना में अधिक उपयोगी होते हैं।
  • व्यक्तिगत पहचान: जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण व्यक्तियों को विधिक दृष्टि से अपनी पहचान स्थापित करने का आधार प्रदान करता है।

चिंताएँ

  • क्षेत्रीय असमानताएँ: विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों में नागरिक पंजीकरण प्रणाली के क्रियान्वयन की गुणवत्ता एवं पूर्णता में अभी भी उल्लेखनीय अंतर बना हुआ है।
  • विलंबित पंजीकरण: अनेक जन्म एवं मृत्यु निर्धारित 21 दिनों की वैधानिक अवधि के अंदर पंजीकृत नहीं हो पाते, जिससे आँकड़ों की समयबद्धता एवं विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
  • शिशु मृत्यु का अपर्याप्त पंजीकरण: यद्यपि पंजीकृत शिशु मृत्यु के 84.2% मामले शहरी क्षेत्रों तथा केवल 15.8% मामले ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त होते हैं, फिर भी उपलब्ध आँकड़े ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु के अपर्याप्त पंजीकरण की संभावना दर्शाते हैं।
  • मृत्यु संबंधी आँकड़ों की निम्न गुणवत्ता: मृत्यु पंजीकरण में अधिकांश मामलों में चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मृत्यु-कारण का उल्लेख नहीं होता, जिससे जनस्वास्थ्य योजना निर्माण एवं रोग निगरानी के लिए इन आँकड़ों की उपयोगिता सीमित हो जाती है।
  • बेहतर आँकड़ा गुणवत्ता एवं सुशासन की आवश्यकता: समयबद्ध पंजीकरण, सटीक अभिलेख संधारण, मृत्यु-कारण का प्रभावी चिकित्सकीय प्रमाणीकरण तथा डिजिटल अभिलेखों के सुरक्षित एवं उत्तरदायी उपयोग पर अधिक बल दिए जाने की आवश्यकता है।
  • आंतरिक प्रवासन के अभिलेखों का अभाव: आंतरिक प्रवासन का व्यवस्थित अभिलेखन करने हेतु प्रभावी व्यवस्था के अभाव में प्रशासनिक योजना निर्माण एवं सेवा वितरण की प्रभावशीलता प्रभावित होती है।

आगे की राह

  • विशेषकर वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में जन-जागरूकता बढ़ाकर, प्रक्रियाओं को सरल बनाकर तथा अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित कर पंजीकरण की पूर्णता एवं समयबद्धता को सुदृढ़ किया जाए।
  • मृत्यु-कारण के चिकित्सकीय प्रमाणीकरण का विस्तार, नियमित आँकड़ा लेखा-परीक्षण तथा सटीक एवं समय पर अभिलेख संधारण सुनिश्चित कर आँकड़ों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए।
  • कम प्रदर्शन करने वाले राज्यों एवं जिलों में क्षमता निर्माण, डिजिटल अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण तथा प्रभावी निगरानी के माध्यम से क्षेत्रीय एवं ग्रामीण-शहरी असमानताओं को कम किया जाए।
  • डिजिटल सुशासन को सुदृढ़ करते हुए नागरिक पंजीकरण प्रणाली के आँकड़ों का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जाए, आंतरिक प्रवासन के अभिलेखों का एकीकरण किया जाए तथा साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण हेतु विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।

स्रोत: IE

 

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